परवाह नहीं चाहे ज़माना कितना भी खिलाफ हो,
थक गई है वो मजबूत बनने का दिखावा करते-करते,
ये दुनिया आँसू देखकर भी तमाशा ढूँढती है।
पर सुना है खुदा मरने से पहले मिलता नहीं।
झूठी दुनिया और झूठे लोगों के बीच निभ नहीं पाता।
हमने तो हर रोती हुई आँख को मुस्कुराना सिखाया है,
जब मिलो किसी से तो जरा दूर का रिश्ता रखना,
जिंदगी भी अब हो गई है बेमकसद और नाराज़।
मोहब्बत मार डालेगी अभी तुम फूल जैसे हो…!
जब मेरे ज़ख़्मों की कहानी सिर्फ़ मैं ही जानता हूँ।
न जाने तन्हाई में कितने अश्क बहाते हैं।
फिर सोचा मैंने उन्हें तड़पाके दर्द मुझको ही होगा,
सच कहूँ तो अब अकेले Sad Shayari in Hindi रहने में ही सुकून है,
हमे पता है की तुम कहीं और के मुसाफिर हो,